https://youtu.be/U4diJ65TSjc?si=jIV3u7afwgvH79yf
दिल की बात कहीं लव पे न आ जाए,
गुस्सैल angry young man की महबूबा, कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है, शायरी !
और वो गुड्डी का महबूब? शायर !!
बेमेल विवाह - marriage of opposite traits ... ये कैसी भक्ति प्रभु !!
ये कैसी भक्ति, प्रभु! ये कैसा प्यार है?
एक ग़ज़ल — दिल, दिमाग़ और बेमेल मोहब्बत के नाम
दिल में जो बात है, लबों पे न आ जाए,
इश्क़ का राज़ कहीं महफ़िल में न खुल जाए।
वो ग़ुस्से में ज़माने को झुका देता है,
वो नज़ाकत से ही पत्थर को पिघला जाए।
एक की आँख में शोले, एक की आँख में ख़्वाब,
कौन समझाए कि ये इश्क़ कहाँ तक जाए?
वो तो हर बात पे तलवार उठा लेता है,
वो हर इक दर्द को ग़ज़लों में छुपा जाए।
एक कहता है कि दुनिया को बदल डालूँगा,
एक कहती है कि पहले कोई मुस्काए।
एक ख़ामोश निगाहों में ग़ज़ल लिखता है,
एक की चीख़ से हर ख़्वाब बिखर जाए।
ऐ ख़ुदा! ये तेरी तक़दीर के कैसे हैं खेल,
एक को आग मिले, एक को सावन मिल जाए!
कभी ग़ुस्सैल जवाँ दिल पे हुकूमत करता,
कभी शायर किसी गुड़िया का दिल बहलाए।
किसी को प्यार में दुनिया से लड़ना आया,
किसी को प्यार में दुनिया ही भुलाना आए।
वो जो कहता था कि पत्थर हूँ, पिघलता ही नहीं,
एक मासूम की हँसी पर ही बिखर जाए।
वो जो कहता था कि मैं इश्क़ में कुछ जानूँ नहीं,
उसकी आँखों में ही अफ़साना नज़र आए।
बेमेल रिश्तों की भी अपनी कहानी है,
कौन जाने कि कहाँ दिल को सुकूँ मिल जाए।
एक की ज़िद है कि दुनिया मेरी मर्ज़ी से चले,
एक की चाह कि बस प्यार से सब चल जाए।
ऐ प्रभु! तेरी भक्ति भी अजब पहेली है,
कोई मंदिर में मिले, कोई ग़ज़ल बन जाए।
दिल की बातों को दबाना भी भला क्या दबाना,
कभी आँसू ही ज़ुबाँ बनकर निकल जाएँ।
इश्क़ चेहरों का नहीं, रूह का रिश्ता है प्रभु,
दो विपरीत दिलों में भी कोई पुल बन जाए।
मक़्ता
हमने पूछा जो ख़ुदा से कि ये कैसा संसार,
बोला—हर बेमेल जोड़ी में नया प्यार है!
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