मृत्युलोक, स्वर्गलोक और वापसी की यात्रा
Ancient Indian Worldview, वर्णाश्रम धर्म, Indian Migration और American-led Globalization के बीच जीवन की चार अवस्थाएँ
Introduction: एक दुनिया नहीं, अनेक लोकों और सभ्यताओं का संसार
आज हम दुनिया को सामान्यतः एक ही global human civilization के रूप में देखते हैं।
देश अलग हैं।
Languages अलग हैं।
Religions अलग हैं।
लेकिन हमारी आधुनिक imagination में पूरी पृथ्वी एक ही मानव इतिहास की यात्रा पर चल रही है।
एक global market।
एक global technology system।
एक global education model।
और increasingly एक common definition of success.
लेकिन भारतीय पुराणों, रामायण, महाभारत और स्मृति-परंपरा में संसार का दृश्य अलग दिखाई देता है।
वहाँ एक ही समय में अलग-अलग लोक, जनसमूह और सभ्यताएँ सक्रिय हैं।
इस लेख की केंद्रीय civilizational imagination में—
मनुष्यलोक अथवा मृत्युलोक भारत और भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़ा हुआ है, जहाँ राजा मनु की राजकीय और सामाजिक व्यवस्था विकसित हुई।
हिमालय, सिंधु, सरस्वती, गंगा और यमुना की नदियों तथा भारतीय उपमहाद्वीप के विशाल भूभाग के बीच एक ऐसी civilization विकसित हुई जहाँ जीवन को केवल economic achievement के रूप में नहीं, बल्कि एक complete journey के रूप में देखा गया।
स्वर्गलोक उत्तर और उत्तर-पश्चिम की दिशा में स्थित देव सभ्यताओं से जुड़ा हुआ है।
इस लेख की central metaphor में हिमालय के पार उत्तर की विशाल दुनिया और आगे Europe तथा North Asia की दिशा में विकसित शक्तिशाली और समृद्ध civilizations को Svarga Loka की स्मृति से जोड़ा गया है।
विशेष रूप से Danube के उत्तर की दिशा में विकसित tall, fair-skinned Deva populations की civilizational memory इस imagination का हिस्सा है।
दानव और दैत्य शक्ति-केंद्र भारत के पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम की दिशा में स्थित शक्तिशाली सभ्यताओं से जुड़े हैं, जहाँ Mesopotamia, Babylon, Nineveh और पश्चिमी एशिया के बड़े शक्ति-केंद्र विकसित हुए।
राक्षस सभ्यताओं की स्मृति दक्षिणी समुद्री क्षेत्रों और Lanka जैसे शक्तिशाली राज्यों से जुड़ती है।
और पाताललोक नागों, विशाल संपदा, भूमिगत तथा गहरे प्राकृतिक resources की कल्पना से जुड़ा हुआ है।
इस प्रकार संसार एक जैसा नहीं था।
अनेक लोक थे।
अनेक राजसत्ताएँ थीं।
अनेक ज्ञान-परंपराएँ थीं।
अनेक शक्ति-केंद्र थे।
और उनके बीच केवल युद्ध नहीं था।
संपर्क था।
व्यापार था।
ज्ञान का आदान-प्रदान था।
संबंध थे।
सहयोग था।
और resources तथा power के लिए संघर्ष भी था।
यही इस लेख की मूल दृष्टि है—
एक संसार, लेकिन एक जैसी सभ्यता नहीं।
अनेक लोक, अनेक शक्ति-केंद्र और अनेक जीवन-पद्धतियाँ।
और इसी framework में आज की Indian migration को भी देखा जा सकता है।
1. मनु का भारत — Manushya Loka और Mrityu Loka
राजा मनु भारत की भूमि से जुड़े हुए हैं।
उनका उद्देश्य पूरी दुनिया के लिए एक universal constitution बनाना नहीं था।
उनका कार्य भारत की अपनी भूमि, समाज और परिस्थितियों के लिए एक सामाजिक और राजकीय व्यवस्था बनाना था।
Modern constitutional thinking प्रायः पूछती है—
What are my rights?
लेकिन भारतीय जीवन-दृष्टि का केंद्रीय प्रश्न था—
मेरा धर्म क्या है?
राजा का धर्म क्या है?
प्रजा का धर्म क्या है?
परिवार का धर्म क्या है?
गृहस्थ का धर्म क्या है?
और सबसे महत्वपूर्ण—
जीवन के इस चरण में मेरा धर्म क्या है?
यहीं से वर्णाश्रम धर्म की व्यापक व्यवस्था सामने आती है।
2. वर्णाश्रम धर्म — Life को एक ही Race न मानने की व्यवस्था
Modern world अक्सर success को एक continuous upward movement की तरह देखता है।
School.
College.
Job.
Promotion.
Salary.
Property.
More wealth.
Retirement.
और फिर भी अधिक wealth।
लेकिन Indian life philosophy का model अलग था।
वह कहती है—
जीवन एक ही दौड़ नहीं है।
Life के different stages में different objectives हैं।
इसीलिए आश्रम व्यवस्था है—
Brahmacharya — सीखना।
Grihastha — बनाना और कमाना।
Vanaprastha — धीरे-धीरे छोड़ना और लौटना।
Sannyasa — स्वयं को मुक्त करना।
यह केवल spiritual framework नहीं है।
यह एक life-cycle management system भी है।
और शायद आज के Indian migration crisis को समझने के लिए यही सबसे उपयोगी framework है।
3. भारत — बदलती प्रकृति के बीच Mrityu Loka
Manu का भारत केवल स्थिर cities और permanent kingdoms का संसार नहीं था।
यह Himalaya, rivers और changing geography के बीच विकसित civilization थी।
Rivers अपना course बदलती थीं।
Floods आते थे।
Droughts आते थे।
Himalayan catastrophes होते थे।
Settlements shift होते थे।
लोग migrate करते थे।
Saraswati की स्मृति हमें उस संसार की याद दिलाती है जहाँ एक नदी के बदलने से पूरा social geography बदल सकता था।
Agriculture बदलता।
Settlements बदलते।
Trade routes बदलते।
और लोग नई भूमि की ओर जाते।
इसी larger context में Arya और अन्य जनसमूहों के movements को समझा जा सकता है।
Nature भी civilization को migrate करने के लिए मजबूर करती है।
भगीरथ और गंगा — शक्ति को धारण करने की कथा
भगीरथ की Ganga Avataran कथा भी इसी अनुभव को एक powerful metaphor में प्रस्तुत करती है।
गंगा की शक्ति इतनी प्रचंड है कि पृथ्वी उसे सीधे ग्रहण नहीं कर सकती।
Shiva उसे अपनी जटाओं में धारण करते हैं।
उसकी शक्ति को नियंत्रित करते हैं।
और फिर वही गंगा जीवनदायिनी बनती है।
संदेश स्पष्ट है—
Uncontrolled power destroys.
Controlled power creates civilization.
Ancient Indian wisdom शायद nature के प्रति यही दृष्टि देती है—
उसे केवल conquer मत करो।
उसकी शक्ति को समझो।
और उसे जीवन के अनुकूल दिशा दो।
4. भारत को Mrityu Loka क्यों कहा गया?
Ancient life में मृत्यु जीवन के बहुत निकट थी।
Disease.
Flood.
Famine.
War.
Accidents.
Wild animals.
Childbirth.
किसी भी ordinary घटना में जीवन समाप्त हो सकता था।
इसलिए मृत्यु कोई दूर की philosophical idea नहीं थी।
वह जीवन की daily reality थी।
इसीलिए यह भूमि—
Mrityu Loka
के रूप में समझी जाती है।
लेकिन मृत्युलोक केवल दुःख की भूमि नहीं है।
यह उस जीवन की भूमि है जहाँ मनुष्य को याद है—
Life is finite.
और इसी कारण human life precious है।
तुलसीदास कहते हैं—
बड़े भाग मानुष तनु पावा।
सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा॥
मनुष्य इसलिए भाग्यशाली नहीं है कि उसे unlimited comfort मिल सकता है।
मनुष्य इसलिए भाग्यशाली है कि वह मृत्यु को जानता है—
और फिर भी पूछ सकता है—
मैं अपने जीवन को किसलिए सँवारूँ?
5. Brahmacharya — Indian Youth की पहली यात्रा
जीवन का पहला चरण है—
Brahmacharya.
आज के Indian context में इसे केवल traditional gurukul के रूप में नहीं समझना चाहिए।
आज इसका अर्थ है—
Education.
Skills.
Discipline.
Knowledge.
Professional preparation.
एक Indian child पढ़ता है।
College जाता है।
Engineering करता है।
Medicine पढ़ता है।
Management करता है।
Research करता है।
Technology सीखता है।
और फिर उसके सामने एक नया प्रश्न आता है—
Where can I build the best life?
यहीं से modern Indian migration की कहानी शुरू होती है।
6. American and European Dream — आधुनिक Indian Youth का Svarga Loka
आज लाखों Indian युवाओं की imagination में America और Europe केवल countries नहीं हैं।
वे opportunity की भूमि हैं।
Higher education.
Better salaries.
Advanced research.
Technology.
Professional growth.
Social mobility.
Comfort.
Security.
Freedom.
और वह चीज़ जिसे broadly कहा जाता है—
A good life.
एक युवा भारत में पढ़ता है।
अपनी क्षमता बनाता है।
और फिर सोचता है—
अगर मैं Silicon Valley पहुँच गया तो?
अगर मुझे New York में job मिल गई तो?
अगर मैं London या Europe में settle हो गया तो?
यह केवल immigration नहीं है।
यह एक प्रकार की quest for Svarga है।
आज का Indian youth उस समृद्ध civilization की ओर जा रहा है जहाँ knowledge, science और technology ने opportunities और comfort का विशाल संसार बनाया है।
वह वहाँ केवल पैसा कमाने नहीं जाता।
वह एक dream fulfil करने जाता है।
एक better life।
Better infrastructure।
Better professional environment।
Better healthcare।
Better opportunities for children।
और वह जीवन जिसे वह भारत में रहते हुए दूर से देखता रहा है।
इस अर्थ में आधुनिक Indian migration को केवल brain drain कह देना पर्याप्त नहीं है।
यह मानव जीवन की उस स्वाभाविक इच्छा की यात्रा है—
जहाँ अवसर अधिक हों, वहाँ जाना।
जहाँ ज्ञान अधिक हो, वहाँ सीखना।
जहाँ prosperity अधिक हो, वहाँ अपनी क्षमता को आज़माना।
और यही जीवन का अगला चरण है—
Grihastha.
7. Grihastha — Svarga में Prosperity की खोज
Grihastha Ashram केवल विवाह करने का नाम नहीं है।
यह संसार में प्रवेश करने का चरण है।
Wealth create करना।
Family build करना।
Children को raise करना।
Professional identity बनाना।
Society और economy में योगदान देना।
आज का NRI जीवन इसी framework में देखा जा सकता है।
India में जन्म।
India में education।
फिर America, Europe या किसी दूसरे advanced society में professional career।
वहाँ technology और knowledge के ecosystem में काम।
Family।
Home।
Children।
Savings।
Investments।
Professional success।
यह आधुनिक रूप में Grihastha की यात्रा है।
और इसमें कोई विरोधाभास नहीं है।
Indian philosophy ने कभी Artha और Kama को जीवन से बाहर नहीं किया।
बल्कि उन्हें legitimate objectives माना।
चार Purusharthas में—
Dharma।
Artha।
Kama।
Moksha।
Artha और Kama को स्थान दिया गया है।
लेकिन उन्हें पूरी जीवन-यात्रा नहीं बनाया गया।
8. Svarga Loka — Knowledge, Science, Power और Prosperity
Svarga Loka की central metaphor यहाँ और स्पष्ट हो जाती है।
Knowledge से Science।
Science से Technology।
Technology से Power।
Power से Prosperity।
America और Europe के modern civilizational success का बड़ा आधार यही है।
Advanced universities।
Scientific research।
Industry।
Capital।
Technology।
Global institutions।
Military power।
Innovation।
और इसी ecosystem ने दुनिया भर के युवाओं को आकर्षित किया।
Indian youth भी इस आकर्षण से अलग नहीं है।
वह वहाँ जाता है क्योंकि उसे अपने जीवन की संभावनाएँ अधिक दिखाई देती हैं।
इसलिए American Dream या European Dream केवल foreign influence नहीं है।
यह एक प्रकार से—
Bhoga और Achievement की मानवीय आकांक्षा है।
मनुष्य अपने सपनों का संसार बनाना चाहता है।
और जब वह संसार कहीं अधिक विकसित दिखाई देता है—
तो वह वहाँ जाने की इच्छा करता है।
9. Ashwamedha — Knowledge और Power का विस्तार
Ashwamedha को इस context में power और expanding influence के ancient metaphor के रूप में देखा जा सकता है।
Knowledge केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं रहता।
Knowledge creates capability.
Capability creates power.
Power creates influence.
Influence seeks expansion.
आज के संसार में भी यही प्रक्रिया दिखाई देती है।
Scientific innovation से technology बनती है।
Technology से economic power।
Economic power से geopolitical influence।
और geopolitical influence से global order।
American-led globalization इसी प्रकार केवल economics की कहानी नहीं है।
यह knowledge, capital और power के global expansion की भी कहानी है।
और Indian youth इसी global system के भीतर अपनी जगह खोज रहा है।
10. लेकिन हर Svarga का एक संकट भी है
मनुष्य जब अपने dream तक पहुँचता है—
तो पहले उसे लगता है—
अब जीवन अच्छा है।
फिर comfort बढ़ता है।
फिर income बढ़ती है।
फिर house।
फिर better house।
फिर investments।
फिर status।
फिर influence।
लेकिन desire हमेशा किसी final point पर समाप्त नहीं होती।
तुलसीदास कहते हैं—
एहि तन कर फल बिषय न भाई।
स्वर्गउ स्वल्प अंत दुखदाई॥
Bhoga जीवन का अंतिम फल नहीं है।
क्योंकि desire fulfil होने के बाद भी मनुष्य के भीतर नया desire जन्म ले सकता है।
यहीं American Dream की एक philosophical limitation सामने आती है।
Dream achieve हो जाता है।
लेकिन—
What after the dream?
Better salary के बाद क्या?
More wealth के बाद क्या?
Children successful हो गए—
फिर क्या?
Retirement के बाद क्या?
यहीं Indian life philosophy और modern global life-model एक-दूसरे से अलग होने लगते हैं।
11. Deva और Danava — केवल Conflict नहीं, Interdependence
Deva और Danava का संबंध केवल enemies का संबंध नहीं है।
वे competing civilizations की तरह भी दिखाई देते हैं।
उनके बीच संघर्ष है।
लेकिन cooperation भी।
इसका सबसे powerful उदाहरण है—
Samudra Manthan.
Devas अकेले Amrit नहीं निकाल सकते।
Danavas भी नहीं।
दोनों को साथ आना पड़ता है।
दोनों की शक्ति चाहिए।
दोनों की capabilities चाहिए।
दोनों को मंथन में भाग लेना पड़ता है।
लेकिन जैसे ही Amrit निकलता है—
प्रश्न बदल जाता है—
Who gets the benefit?
यहीं cooperation competition में बदलता है।
Modern globalization भी ऐसा ही है।
पूरी दुनिया global production system में जुड़ी है।
लेकिन wealth और power बराबर distribute नहीं होती।
इसलिए civilizations एक-दूसरे की partners भी हैं—
और competitors भी।
12. Globalization — आधुनिक Samudra Manthan
Research एक country में।
Technology दूसरी में।
Manufacturing तीसरी में।
Raw materials चौथी में।
Labour कहीं और।
Consumers पूरी दुनिया में।
पूरी पृथ्वी एक विशाल economic Samudra Manthan में शामिल है।
लेकिन Amrit कौन ले जाता है?
किसके पास patents हैं?
किसके पास technology control है?
किसके पास capital है?
किसके पास global institutions पर influence है?
किसके पास military power है?
यहीं modern world में Deva-Danava relationship की complexity दिखाई देती है।
Cooperation और Competition साथ-साथ।
13. Vanaprastha — NRI की वापसी की यात्रा
यहीं Indian civilization का सबसे महत्वपूर्ण विचार सामने आता है।
Vanaprastha.
जीवन का तीसरा चरण।
Grihastha का काम पूरा हो चुका है।
Children बड़े हो चुके हैं।
Professional identity बन चुकी है।
Wealth की basic security बन चुकी है।
अब प्रश्न है—
क्या पूरी जिंदगी और अधिक accumulation ही करनी है?
यहीं Indian life philosophy एक नई दिशा देती है।
धीरे-धीरे—
Power छोड़ो।
Control छोड़ो।
Accumulation कम करो।
Next generation को space दो।
और जीवन के उस स्रोत की ओर लौटो जिसने तुम्हें जन्म दिया।
आज के NRI के लिए Vanaprastha का एक modern meaning हो सकता है—
Return to the Motherland.
यह केवल emotional nationalism नहीं है।
यह life-cycle का एक philosophical transition भी हो सकता है।
Brahmacharya में भारत ने शिक्षा दी।
Grihastha में व्यक्ति दुनिया में गया और अपनी क्षमता विकसित की।
उसने wealth बनाई।
Knowledge और experience प्राप्त किया।
तो Vanaprastha में वह क्या कर सकता है?
वह भारत लौट सकता है।
अपना अनुभव वापस ला सकता है।
अपना knowledge share कर सकता है।
Community building कर सकता है।
नई generation को mentor कर सकता है।
अपने roots से reconnect कर सकता है।
और धीरे-धीरे life को accumulation से contribution की ओर मोड़ सकता है।
14. क्यों Return to India केवल Retirement नहीं है
Modern retirement अक्सर केवल employment से exit है।
लेकिन Vanaprastha उससे कहीं अधिक गहरा है।
यह identity का transformation है।
पहले प्रश्न था—
What can I achieve?
अब प्रश्न है—
What can I give?
पहले—
How much can I accumulate?
अब—
What can I distribute?
पहले—
How can I expand my influence?
अब—
How can I guide without controlling?
इसीलिए NRI की भारत वापसी को केवल property खरीदने या आराम से retirement बिताने के रूप में नहीं देखना चाहिए।
यदि वह अपनी civilizational roots से फिर जुड़ता है—
तो वह एक प्रकार का modern Vanaprastha हो सकता है।
15. Dasharatha का Mirror — सही समय पर मुकुट उतारना
रामचरितमानस का Dasharatha episode इस विचार को अत्यंत सुंदर रूप में प्रस्तुत करता है।
दशरथ दर्पण देखते हैं।
अपना मुकुट ठीक करते हैं।
और कानों के पास सफेद बाल देखते हैं।
रायँ सुभायँ मुकुरु कर लीन्हा।
बदनु बिलोकि मुकुट सम कीन्हा॥
श्रवन समीप भए सित केसा।
मनहुँ जरठपनु अस उपदेसा॥
नृप जुबराज राम कहुँ देहू।
जीवन जनम लाहु किन लेहू॥
मानो वृद्धावस्था स्वयं कह रही हो—
अब मुकुट आगे सौंप दो।
अब जीवन का दूसरा अर्थ खोजो।
यही Vanaprastha की सबसे बड़ी शिक्षा है।
Modern world हमें लगातार आगे बढ़ना सिखाता है।
More career.
More money.
More investments.
More status.
लेकिन Dasharatha का दर्पण पूछता है—
When is enough enough?
कभी सबसे बड़ी achievement आगे बढ़ना नहीं होती।
कभी सबसे बड़ी achievement होती है—
सही समय पर मुकुट उतार देना।
16. 75 के बाद — Sannyasa, Satsang और Naad Brahma
जीवन का चौथा चरण है—
Sannyasa.
यह आवश्यक नहीं कि हर व्यक्ति literally संसार छोड़ दे।
लेकिन inner meaning बदल जाता है।
अब career नहीं।
अब competition नहीं।
अब social status नहीं।
अब wealth accumulation नहीं।
अब प्रश्न है—
मैं कौन हूँ?
आज के NRI या किसी भी आधुनिक व्यक्ति के लिए यह चरण विशेष रूप से challenging हो सकता है।
बच्चे जिस देश में बड़े हुए हैं, वहीं रहना चाहते हैं।
Parents अपने homeland से कट चुके होते हैं।
Friends अलग-अलग देशों में होते हैं।
Retirement के बाद loneliness बढ़ सकती है।
यहीं Indian tradition का उत्तर आता है—
Satsang.
Trust-based community.
Friends.
Music.
Service.
Spiritual companionship.
Vihar.
Sadhana.
और धीरे-धीरे—
Naad Brahma.
17. Motherland में लौटने का अर्थ
भारत लौटना केवल India की geography में लौटना नहीं है।
यह memory में लौटना है।
Language में लौटना है।
Family और community में लौटना है।
Festivals में लौटना है।
Music में लौटना है।
अपने cultural rhythm में लौटना है।
और शायद सबसे महत्वपूर्ण—
मृत्यु की reality के साथ फिर से जीना सीखना है।
Svarga-like world में मनुष्य comfort के माध्यम से मृत्यु को दूर रखने की कोशिश करता है।
लेकिन Manushya Loka मनुष्य को याद दिलाता है—
Life is finite.
और इसी कारण—
हर संबंध meaningful है।
हर सेवा meaningful है।
हर दिन meaningful है।
और हर विदाई भी जीवन का हिस्सा है।
18. Manushya Loka की अंतिम शिक्षा
Svarga Loka हमें सिखाता है—
Knowledge दुनिया को बदल सकता है।
Deva-Danava relationship हमें सिखाता है—
Civilizations केवल enemies नहीं होतीं।
वे competitors भी होती हैं।
Partners भी।
और एक-दूसरे पर dependent भी।
Globalization हमें सिखाता है—
पूरी दुनिया एक विशाल Samudra Manthan में जुड़ सकती है।
लेकिन Manushya Loka एक अलग प्रश्न पूछता है—
तुम्हें जो जीवन मिला है, उसका करोगे क्या?
शायद इसीलिए तुलसीदास कहते हैं—
बड़े भाग मानुष तनु पावा।
मनुष्य जीवन का सौभाग्य केवल यह नहीं है कि हम अपने लिए Svarga बना सकते हैं।
सौभाग्य यह है कि—
Svarga तक पहुँचने के बाद भी हम वापस आने का निर्णय कर सकते हैं।
Conclusion: एक Indian Life Journey — भारत से Svarga और फिर भारत की ओर
शायद आज के global Indian के लिए वर्णाश्रम की आधुनिक यात्रा इस प्रकार देखी जा सकती है—
Brahmacharya — भारत में सीखो
अपनी roots से शिक्षा लो।
Knowledge और capability बनाओ।
दुनिया को समझने के लिए तैयार हो।
Grihastha — दुनिया में जाओ और बनाओ
America जाओ।
Europe जाओ।
या दुनिया के किसी भी opportunity-rich region में जाओ।
Learn करो।
Work करो।
Create करो।
Earn करो।
अपने dreams पूरे करो।
अपने परिवार को security दो।
यह Artha और Kama का legitimate चरण है।
Vanaprastha — Motherland की ओर लौटो
जब career का मुख्य उद्देश्य पूरा हो जाए—
तो केवल accumulation की दौड़ में मत फँसे रहो।
अपने knowledge, wealth और experience के साथ वापस आओ।
India में contribute करो।
नई generation को mentor करो।
Community बनाओ।
अपने parents, family और society के साथ फिर जुड़ो।
Sannyasa — स्वयं की ओर लौटो
75 के बाद शायद प्रश्न यह नहीं रहना चाहिए—
What more can I achieve?
बल्कि—
What remains when I no longer need to achieve?
तब—
Satsang.
Sadhana.
Seva.
Music.
Silence.
और अंततः—
Naad Brahma.
शायद यही आधुनिक Indian migration और ancient Indian wisdom के बीच सबसे सुंदर reconciliation हो सकता है।
India को दुनिया से कटना नहीं है।
Indian youth को विदेश जाने से रोकना भी नहीं है।
उसे Svarga की ओर जाने दो।
उसे सीखने दो।
उसे बनाने दो।
उसे अपने dreams पूरे करने दो।
लेकिन उसे यह भी याद दिलाओ—
Life is not an endless one-way migration.
मनुष्य केवल बाहर जाने के लिए पैदा नहीं होता।
एक समय ऐसा भी आता है—
जब उसे लौटना होता है।
पहले—
विद्या के लिए।
फिर—
विज्ञान और समृद्धि के लिए।
फिर—
विवेक के लिए।
और अंततः—
स्वयं के लिए।
विद्या से विज्ञान।
विज्ञान से शक्ति।
शक्ति से समृद्धि।
समृद्धि से भोग।
भोग से विवेक।
विवेक से धर्म।
धर्म से त्याग।
त्याग से वापसी।
वापसी से साधना।
और साधना से—Naad Brahma।
शायद यही Manushya Loka की सबसे बड़ी शिक्षा है—
Svarga की खोज करो।
लेकिन उसमें खो मत जाओ।
और जब जीवन का समय आए—
अपने भीतर और अपने मूल की ओर लौट आओ।

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