Sunday, April 12, 2026

मन जाहि राचहु मिलहि वो राम, सहज उदासी, वनवासी, वैकुंठ निवासी।

 

मानहुं एक भक्ति / मोहब्बत का नाता,
अब CV, पैकेज, पासपोर्ट से होता है नापता।

वफ़ा जिनसे की, बेवफ़ा हो गए—
वो वादे मोहब्बत के क्या हो गए?
जो कल थे “तपसी, वनवासी” से सच्चे,
आज swipe right में सब कच्चे-पक्के।

कहते थे — “साथ जन्मों का बंधन”,
अब clause लगा है — “subject to conditions”।
सात फेरे भी अब EMI पर चलते,
रिश्ते quarterly review में पलते।

महाराज, आपकी कन्या के लिए
कोई NRI इंडियन अमेरिकन सही रहेगा—
salary strong, accent clean,
Instagram pe perfect couple scene रहेगा।

धर्म, संस्कार, कुल की मर्यादा,
सब LinkedIn bio में add कर लेना ज़्यादा।
Compatibility अब कुंडली से नहीं,
Netflix history से match कर लेना भला।

खुंदक, कुढ़न, जलन कुछ ऐसी—
होठों से बयां वो भला हो कैसी?
मुस्कान में sarcasm, दिल में हिसाब,
और रिश्ते बन गए silent खराब।

“तुम अपना संघर्ष घर के बाहर ही रखो,
मुझे तो बस शॉपिंग ले चलो।”
थकान, तनाव, जीवन की जद्दोजहद—
सब बाहर छोड़ो, अंदर बस photo।

मोहब्बत अब “space” माँगती है,
और वफ़ा “mental health break” पर जाती है।
Ego ही अब घर का देवता है,
और संवाद? — वो last seen में सो जाता है।

तलाक़ अब विफलता नहीं, “growth” है,
हर रिश्ता एक “learning curve” है।
और जो निभा ले चुपचाप उम्र भर,
वो आज के दौर में “outdated nerve” है।

मानहुं एक भक्ति / मोहब्बत का नाता—
पर अब नाता नहीं, एक contract सा है,
जहाँ दिल नहीं, terms & conditions का राज है।

और अंत में बस इतना ही कहना—
न “तपसी” बचे, न “वनवासी”,
बस profiles बचे हैं…
और choices की अनंत उदासी।

मन जाहि राचहु मिलहि वो राम,
सहज उदासी, वनवासी, वैकुंठ निवासी।

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