“मरना तो है एक दिन…” — यह वाक्य हमारी सबसे बड़ी सामूहिक भूल कैसे बन गया
“मरना तो है एक दिन…”
यह वाक्य आज के समय का सबसे खतरनाक दर्शन बन चुका है।
इसे लोग वैराग्य समझते हैं,
असल में यह ज़िम्मेदारी से पलायन है।
यह वही सोच है जो कहती है —
“थोड़ा ज़हर तो सब खाते हैं”
“प्रदूषण से कौन बचा है”
“तनाव तो सबको होता है”
“देखी जाएगी…”
और फिर हम आदतन सब कुछ सहते चले जाते हैं।
जोखिम को सामान्य बना देने की बीमारी
आज की उपभोक्ता संस्कृति ने हमें एक अजीब मानसिकता सिखा दी है:
- ज़हरीला खाना? — चलता है
- दूषित हवा? — एडजस्ट कर लो
- केमिकल एक्सपोज़र? — लिमिट के अंदर है
- सिस्टम फेल्योर? — सब जगह ऐसा ही है
यही सोच उद्योगों में Normalization of Risk कहलाती है।
यानी —
जो कल अस्वीकार्य था,
वह आज “मैनेजेबल” है,
और कल “स्टैंडर्ड प्रैक्टिस” बन जाता है।
PMOC और HSE की असली लड़ाई यहीं है
Project Management of Change (PMOC),
HSEIA,
AIPS —
ये सब दस्तावेज़ नहीं हैं।
ये दरअसल मानसिकता की परीक्षा हैं।
सवाल यह नहीं होता कि:
“सब अप्रूवल मिल गया या नहीं?”
असल सवाल होता है:
“क्या हम जोखिम को सच में घटा रहे हैं — या बस उसे स्वीकार करना सीख गए हैं?”
जब लोग कहते हैं —
“मरना तो है एक दिन…”
तभी से सुरक्षा मरने लगती है।
‘मैं चौराहे से नहीं जाऊँगा…’ — एक खतरनाक भ्रम
“मैं चौराहे पर नहीं आऊँगा,
पिछले दरवाज़े से झोला लेकर निकल जाऊँगा…”
यह वही सोच है जो नियमों को चकमा देने में गर्व महसूस करती है।
पर सच्चाई यह है —
जो जोखिम से भागता है,
वह उससे बचता नहीं —
बस देर से पकड़ में आता है।
प्रकृति, स्वास्थ्य और सिस्टम —
तीनों के पास ऑडिट का अधिकार होता है।
और वहाँ कोई ‘जुगाड़’ काम नहीं आता।
यमदूत प्रतीक हैं — डराने के लिए नहीं, समझाने के लिए
यमदूत कोई पौराणिक डर नहीं हैं।
वे परिणाम के प्रतीक हैं।
जब चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया जाता है,
जब सिस्टम को धोखा दिया जाता है,
जब जोखिम को हल्के में लिया जाता है —
तो परिणाम चुपचाप आते हैं।
बिना शोर किए।
बिना नोटिस दिए।
निष्कर्ष: सभ्यता की परीक्षा यहीं होती है
समाज की परिपक्वता इस बात से नहीं मापी जाती कि वह कितना जोखिम ले सकता है,
बल्कि इससे मापी जाती है कि वह कितना जोखिम अस्वीकार कर सकता है।
जो सभ्यता यह कह दे —
“नहीं, यह स्वीकार्य नहीं है”
वही आगे चलती है।
बाकी सब सिर्फ यह कहते रहते हैं —
“मरना तो है एक दिन…”
और फिर हैरान होते हैं जब वह दिन जल्दी आ जाता है।
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