Friday, September 25, 2026

गोपी गीत - तुम्हारा इंतजार है

 तुम्हारा इंतज़ार है

मुख़्तसर सी बात है, तुमसे प्यार है,
तुम्हारा इंतज़ार है, तुम्हारा इंतज़ार है।

नैनों में बसे हो, साँसों में समाए,
मन के हर कोने में तुम ही तुम आए।
बिन तुम्हारे सूना, ये संसार है,
तुम्हारा इंतज़ार है, तुम्हारा इंतज़ार है।

मुख़्तसर सी बात है, तुमसे प्यार है,
तुम्हारा इंतज़ार है, तुम्हारा इंतज़ार है।

यमुना के तट पर चाँदनी रात है,
कदंब की छाँव में कैसी बरसात है।
बाँसुरी की धुन का अब भी खुमार है,
लगता है कान्हा, तुम यहीं कहीं हो—
फिर भी दिल बेकरार है।

तुम्हारा इंतज़ार है, तुम्हारा इंतज़ार है।

पायल की रुनझुन पूछे—कहाँ गए श्याम?
चूड़ी की खनक लेती तुम्हारा ही नाम।
द्वार खुला रखा है, दीपक भी जला है,
हर आहट में लगता—
मेरा मोहन चला है।

पर सूना आँगन, सूना द्वार है,
तुम्हारा इंतज़ार है, तुम्हारा इंतज़ार है।

सखियाँ कहती हैं—भूल जाओ उन्हें,
कैसे समझाऊँ ये बात अपने मन को मैं?
जिसने चुरा लिया है मन एक बार,
उससे कैसे माँगूँ अपना मन दोबारा?

मन तो तुम्हारा ही अधिकार है,
तुम्हारा इंतज़ार है, तुम्हारा इंतज़ार है।

निंदिया भी रूठी, रात भी ढलती,
याद तुम्हारी आँखों से बरसती।
एक तुम्हारी झलक की आस है,
एक तुम्हारे चरणों की प्यास है।
जीवन भी जैसे अधूरा गीत है,
जिसमें तुम्हारे सुर की दरकार है।

तुम्हारा इंतज़ार है, तुम्हारा इंतज़ार है।

कभी लगता है तुम पवन बन आए,
कभी लगता बादल बन छाए।
कभी फूलों की खुशबू में मिलते,
कभी श्याम रंग बन दिल में खिलते।
तुम दूर कहाँ हो, ये कैसा भ्रम है—
हर कण में तुम्हारा विस्तार है।

फिर भी ये आँखें राह निहारें,
फिर भी ये साँसें तुम्हें पुकारें—
क्योंकि प्रेम का यही तो सार है,
मिलन से अधिक विरह में प्यार है।

मुख़्तसर सी बात है, तुमसे प्यार है,
तुम्हारा इंतज़ार है, तुम्हारा इंतज़ार है।

आओ न कान्हा, एक बार आओ,
रूठी हुई राधा को फिर से मनाओ।
बाँसुरी की एक तान सुना दो,
सूने मन में फिर से रंग भर दो।

तुम आ जाओ तो जीवन बहार है,
तुम बिन ये जग सारा बेकार है।

मुख़्तसर सी बात है, तुमसे प्यार है,
तुम्हारा इंतज़ार है...
तुम्हारा इंतज़ार है...

तुम्हारा इंतज़ार है।

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