Wednesday, September 23, 2026

आएगा आने वाला, जाएगा जाने वाला!

 

आएगा आने वाला, जाएगा जाने वाला!

समय बदलता है, पीढ़ियाँ बदलती हैं, विचार और सामाजिक प्रवृत्तियाँ भी बदलती रहती हैं।

हमारा धर्म और दायित्व है कि हम ईश्वर द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का प्रयास करें—सत्य, प्रेम, अहिंसा, करुणा, सेवा और भाईचारे के मार्ग पर।

हर धर्म, हर परम्परा और हर आध्यात्मिक मार्ग ने अपने-अपने ढंग से मनुष्य को भीतर की शुद्धता, प्रेम और सत्य की ओर ले जाने का संदेश दिया है।

परन्तु समय के साथ कभी-कभी धर्म का मूल आध्यात्मिक संदेश लोकप्रिय संस्कृति, बाहरी आडंबर, संस्थागत पहचान या सामाजिक प्रतिस्पर्धा के पीछे छूट जाता है।

फिर भी संतों, महात्माओं, फकीरों, गुरुओं और साधकों की परम्परा आज भी जीवित है—और सदैव जीवित रहेगी।

क्योंकि सच्ची आध्यात्मिकता लोकप्रिय होने के लिए नहीं होती।
वह मनुष्य को भीतर से बदलने के लिए होती है।

लोकप्रियता बदलती रहती है,
सत्ता बदलती रहती है,
समय बदलता रहता है—
लेकिन सत्य, प्रेम और करुणा का मूल्य कभी पुराना नहीं होता।

यदि संत-महात्मा भी केवल लोकप्रिय संस्कृति के अनुरूप चलने लगें,
तो फिर वे हमें लोकप्रियता से परे सत्य की खोज का मार्ग कैसे दिखाएँगे?

इसलिए किसी भी धर्म या परम्परा को छोड़ने या अपनाने से अधिक महत्वपूर्ण है—
उसके भीतर छिपे सत्य, प्रेम और मानवीयता को पहचानना और अपने जीवन में उतारना।

आएगा आने वाला, जाएगा जाने वाला—
पर सत्य की खोज, प्रेम की भावना और मानवता की साधना चलती रहेगी।

🙏🙏

सरस्वती संगीत गुरुकुल (SSG)
संगीत • साधना • संवाद • संस्कार

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