Monday, June 1, 2026

बाबा मुक्ति स्तोत्र (ग्राम्य भाषा में, कलियुग के पोस्टाचार्यन के नाम)

 

बाबा मुक्ति स्तोत्र

(ग्राम्य भाषा में, कलियुग के पोस्टाचार्यन के नाम)

शिष्य उवाच —

हे बाबा!

दिन भर में कतनी पोस्ट ठेलत हो?

कउनो फँसा कि नाहीं?


बाबा उवाच —

बच्चा!

फँसावनौ बड़ा कठिन तप है।

आज नाहीं,

त काल।

काल नाहीं,

त परसों।

कबहूँ न कबहूँ

कउनो न कउनो अइहै।


शिष्य उवाच —

बाबा!

जौन एक ठो थी,

ऊ भी भाग गई।


बाबा उवाच —

अरे मूर्ख!

पोस्ट में हमार फोटो कहाँ लगायो था?

ज्ञान-व्यान से का होत है?

फोटो लगाव,

भक्त बनाव।


शिष्य उवाच —

बाबा!

तुम्हार फोटो में अइसन का है?


बाबा उवाच —

फोटोए ब्रह्म है।

रीलए वेद है।

फॉलोअरए साधना है।

लाइकए मोक्ष है।


तब साधक गरियावत बोला —

ओए बाबा जी!

तोहरे से किसने माँगा ज्ञान?

हम त चाय पिये आये रहे।


बाबा उवाच —

यही त लीला है बच्चा।

कउनो चाय पीये आवत है।

कउनो दुःख सुनावे आवत है।

कउनो ज्ञान लेवे आवत है।

सबके हाथ में

सदस्यता फॉर्म पकड़ा दिहल जात है।


जय हो पोस्टाचार्य महाराज की।

जय हो रीलानन्द स्वामी की।

जय हो लाइकानन्द परमहंस की।

जय हो फॉलोअरगिरि पीठाधीश्वर की।


मुक्ति मंत्र

न बाबा पे भरोसा।

न फोटो पे भरोसा।

न रील पे भरोसा।

न लाइक पे भरोसा।

अपने दिमाग पे भरोसा।

अपने विवेक पे भरोसा।

साँच पे भरोसा।


फलश्रुति

जौन मनई रोज सबेरे

ई स्तोत्र पढ़ि लेत है,

ऊ बाबा के कोर्स,

प्रीमियम दीक्षा,

वीआईपी दर्शन,

विशेष अनुष्ठान,

ऑनलाइन मोक्ष योजना,

आदि से यथाशक्ति बचल रहत है।


अंतिम चौपाई

पोस्ट पोस्ट सब जगत ठगाना।

फोटो देखि भटका जमाना॥

जाग रे भाई, आँखि उघार।

विवेक बिना सब बेकार॥

॥ इति श्री बाबा मुक्ति स्तोत्र समाप्त ॥ 🙏

 

श्री बाबा-मुक्ति स्तोत्रम्

(कलियुगे सोशल-मीडिया-प्रसिद्ध-बाबानां निवृत्तये)

ॐ नमो विवेकाय।


शिष्य उवाच —

दिनेषु कतिपयान् पोस्टान् क्षिपसि भोः बाबा?

कश्चित् जनः अद्यावधि फसित्वा दृश्यते किम्?


बाबा उवाच —

वत्स!

अद्य न फसति,

श्वः फसति।

श्वः न फसति,

परश्वः फसति।

फँसनमेव मोक्षमार्गः।


शिष्य उवाच —

हे गुरुदेव!

या एका भक्तिका आसीत्,

सापि पलायिता।


बाबा उवाच —

मा शुचः वत्स।

अग्रिमे पोस्टे

मम चित्रं निवेशय।

ज्ञानस्य किम् प्रयोजनम्?

चित्रमेव परब्रह्म।


ॐ बाबा-फोटो-महिम्ने नमः।

ॐ रीलस्वरूपाय नमः।

ॐ लाइकप्रदाय नमः।

ॐ फॉलोअरवर्धनाय नमः।

ॐ प्रायोजितमोक्षदाय नमः।


रीलं वेदः।

पोस्टः पुराणम्।

फॉलोअराः शिष्याः।

कमेंटाः पुष्पाञ्जलिः।

शेयरः महायज्ञः।

स्पॉन्सरशिप् परमपदम्।


तदा क्रुद्धः साधकः उवाच —

ओए बाबा जी!

त्वत्तः केन ज्ञानं याचितम्?

नाहं मोक्षार्थी।

नाहं फॉलोअरार्थी।

चायार्थमेव आगतः।


बाबा उवाच —

वत्स!

एषैव माया।

चायया आरभ्यते।

दानेन समाप्त्यते।


अथ बाबा-मुक्ति-मन्त्रः —

न बाबा शरणं गच्छामि।

न फोटो शरणं गच्छामि।

न रीलं शरणं गच्छामि।

न फॉलोअरान् शरणं गच्छामि।

विवेकं शरणं गच्छामि।

सत्यं शरणं गच्छामि।

स्वात्मानं शरणं गच्छामि॥


फलश्रुतिः

यः प्रातःकाले

एतत् बाबा-मुक्ति-स्तोत्रं पठति,

तस्य बुद्धिः

रील-मोहात् विमुच्यते।

तस्य चित्तम्

फोटो-प्रलोभनात् रक्ष्यते।

तस्य धनम्

सदस्यता-योजनाभ्यः सुरक्षितं भवति।

तस्य विवेकः

अक्षुण्णः तिष्ठति।


इति श्री

कलियुग-डिजिटल-बाबा-मुक्ति-स्तोत्रम्

सम्पूर्णम्।

॥ ॐ विवेकाय नमः ॥ ॥ ॐ सत्याय नमः ॥ ॥ ॐ स्वाध्यायाय नमः ॥

 

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