Monday, January 19, 2026

यूनानी–ईरानी–भारतीय दार्शनिक परंपराएँ और सूफ़ी दर्शन का उद्भव ग्रीक Neoplatonism से लेकर इब्न अरबी की Wahdat-ul-Wujūd तक

 



यूनानी–ईरानी–भारतीय दार्शनिक परंपराएँ और सूफ़ी दर्शन का उद्भव

ग्रीक Neoplatonism से लेकर इब्न अरबी की Wahdat-ul-Wujūd तक


🔶 सार (Abstract)

यह शोध-पत्र यह स्थापित करता है कि 12वीं–13वीं शताब्दी का सूफ़ी दर्शन किसी एक धार्मिक परंपरा की उपज नहीं था, बल्कि वह यूनानी दार्शनिक चिंतन, ईरानी-ज़ोरास्ट्रियन प्रतीकवाद, भारतीय ज्ञान परंपरा और इस्लामी आध्यात्मिकता के ऐतिहासिक संगम से विकसित हुआ।

विशेषतः यह अध्ययन दर्शाता है कि:

  • ग्रीक Neoplatonism ने अस्तित्व की दार्शनिक संरचना दी
  • ईरानी परंपरा ने प्रकाश, आत्मा और नैतिक द्वैत की भाषा दी
  • भारतीय ज्ञान ने गणित, खगोल, तर्क और प्रतीकात्मक सोच दी
  • इस्लामी सूफ़ी संतों ने इन सबको एक ईश्वर-केंद्रित आध्यात्मिक प्रणाली में रूपांतरित किया

जिसका शिखर रूप हमें इब्न अरबी की Wahdat-ul-Wujūd (अस्तित्व की एकता) में दिखाई देता है।


भाग–1

ग्रीक परंपरा: Neoplatonism और “The One”

तीसरी शताब्दी में Plotinus ने Neoplatonism का विकास किया।

मूल अवधारणा:

  • The One (परम सत्य)
  • उससे निकलता है Nous (बुद्धि)
  • फिर World Soul
  • और अंततः भौतिक संसार

यह सृष्टि नहीं, बल्कि emanation (प्रवाह) की संकल्पना थी।

📘 संदर्भ:
https://plato.stanford.edu/entries/neoplatonism/
https://plato.stanford.edu/entries/theology-aristotle/


भाग–2

यूनानी दर्शन का इस्लामी संसार में प्रवेश

(Abbasid Translation Movement)

8वीं–10वीं शताब्दी में बग़दाद के Bayt al-Hikma में:

  • Greek → Syriac → Arabic
  • Aristotle, Plotinus, Galen का अनुवाद
  • “Theology of Aristotle” नाम से Plotinus का प्रसार

📘
https://en.wikipedia.org/wiki/Graeco-Arabic_translation_movement
https://plato.stanford.edu/entries/arabic-islamic-greek/

👉 यही वह बिंदु है जहाँ ग्रीक metaphysics इस्लामी बौद्धिक भाषा बनती है।


भाग–3

भारतीय ज्ञान कैसे पहुँचा इस्लामी संसार में?

❗महत्वपूर्ण तथ्य:

संस्कृत ग्रंथ सीधे नहीं, बल्कि ईरानी–पहलवी मध्यस्थता से पहुँचे।

प्रमुख माध्यम:

  1. पंचतंत्र → कलीला व दिम्ना
  2. आर्यभट्ट–ब्रह्मगुप्त → Hisab al-Hind
  3. सूर्य सिद्धांत → Sindhind

📘
https://www.britannica.com/topic/Kalila-and-Dimna
https://www.britannica.com/science/Arabic-numerals

➡️ इससे अरबों को:

  • दशमलव
  • शून्य
  • खगोल-गणना
  • चिकित्सा ज्ञान

मिला।


भाग–4

ईरानी (Achaemenid–Zoroastrian) परंपरा की भूमिका

ईरानी सभ्यता ने दिया:

  • प्रकाश बनाम अंधकार की अवधारणा
  • नैतिक ब्रह्मांड
  • आत्मा का आध्यात्मिक उत्थान
  • “दैवी प्रकाश” की कल्पना

जो आगे चलकर:

  • सूफ़ी “नूर”
  • इल्म-ए-बातिन
  • रूहानी यात्रा

में बदल गई।

📘
https://www.britannica.com/topic/Zoroastrianism
https://www.iranicaonline.org/articles/corbin-henry-b


भाग–5

सुहरावर्दी और Illuminationism (12वीं सदी)

शहाबुद्दीन सुहरावर्दी ने कहा:

“सत्य प्रकाश है, और अस्तित्व प्रकाश की विभिन्न तीव्रताएँ हैं।”

यह दर्शन:

  • Greek Neoplatonism
  • Iranian light symbolism
  • Islamic metaphysics

का संगम था।

📘
https://plato.stanford.edu/entries/suhrawardi/


भाग–6

इब्न अरबी और Wahdat-ul-Wujūd

इब्न अरबी (1165–1240)

उन्होंने कहा:

“अस्तित्व एक है — भेद केवल दृष्टि का है।”

यह दर्शन:

  • ईश्वर = अस्तित्व
  • सृष्टि = उसका प्रकटन
  • आत्मा = दैवी चेतना का अंश

📘
https://plato.stanford.edu/entries/ibn-arabi/
https://www.britannica.com/biography/Ibn-al-Arabi


भाग–7

रूमी, काकी और बाबा फ़रीद — भारतीय संदर्भ

संत योगदान
रूमी प्रेम आधारित आध्यात्म
बख़्तियार काकी सूफ़ी परंपरा का भारतीयीकरण
बाबा फ़रीद लोकभाषा में सूफ़ी दर्शन

इन्हीं से आगे:

  • चिश्ती परंपरा
  • कव्वाली
  • भक्ति आंदोलन

का विकास हुआ।


भाग–8

निष्कर्ष: एक सभ्यतागत संगम

✔ यूनान → दर्शन
✔ ईरान → प्रतीक
✔ भारत → ज्ञान
✔ इस्लाम → आध्यात्मिक अनुशासन
✔ सूफ़ी → मानवीय अनुभूति

👉 सूफ़ी दर्शन किसी एक संस्कृति का नहीं, बल्कि मानव सभ्यता का साझा उत्कर्ष है।


📚 संदर्भ सूची (Direct URLs)



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