हनुमान चालीसा, संत गाथा -
https://youtu.be/oNiiw1d5F1c?si=LsKRCp6hhwFI5w6c
Parmatma me lau, chitta, soorat lagna
https://youtu.be/YaVQBMe_flU?si=FYGSVOFVRv11cRbe
📜 कबीर बीजक और गुरु ग्रंथ साहिब : एक ही साधना-रेखा
1️⃣ सूरत लगना = चित्त की स्थिरता (Attention → Alignment)
कबीर (बीजक) कहते हैं —
“सुरति लागी तो घट उजियारा।”
यह कोई कुंडलिनी-तमाशा नहीं है।
यह है —
- चित्त का एकाग्र होना,
- नाम में ठहर जाना,
- और अहंकार का गल जाना।
गुरु ग्रंथ साहिब भी यही कहता है:
“मन तू जोति सरूप है, अपना मूल पछाण।”
यह अलख जगाने का सीधा अर्थ है —
👉 अपने भीतर की चेतना को पहचानना,
न कि किसी रहस्यमय लोक का भ्रम पैदा करना।
2️⃣ राम नाम = ध्वनि नहीं, दिशा
कबीर का राम —
- अयोध्या का राजा नहीं,
- किसी संप्रदाय की बपौती नहीं,
बल्कि
👉 चेतना का नाम है।
गुरु ग्रंथ साहिब में भी:
“राम नामु मनि बसै, ता फिरि दूखु न होइ।”
अर्थात —
राम नाम जपने की क्रिया नहीं,
जीवन का पुनर्संरेखण (re-orientation) है।
3️⃣ संत-फकीर के चरण = व्यक्तित्व नहीं, वाणी
आपका कथन बहुत निर्णायक है:
“संत फकीर के चरणों में, उनकी वाणी के सानिध्य से (सुनने, पढ़ने से) होती है।”
यही कबीर की कसौटी है।
कबीर कहते हैं —
“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।”
अर्थ:
- गुरु का शरीर नहीं,
- गुरु की वाणी निर्णायक है।
जो वाणी —
- डर न पैदा करे,
- चमत्कार न बेचे,
- और शिष्य को स्वतंत्र न बनाए
👉 वह वाणी गुरु-वाणी नहीं।
🔍 राम नाम क्या है?
❌ मंत्रों का शोर नहीं
❌ रहस्यात्मक अनुभवों की लत नहीं
✅ चेतना का पुनर्संरेखण
✅ जीवन की दिशा का शुद्ध होना
✅ भय से मुक्ति, विवेक की वृद्धि
⚠️ चेतावनी (Warning) — कबीर + गुरु ग्रंथ साहिब दोनों की ओर से
⚠️ चेतावनी | जनहित में जारी
जो बहुत रहस्य बोले,
जो चमत्कार दिखाए,
जो पहेलियों में उलझाए —
उससे दूर रहें।
🕯️ सच्ची साधना
परमात्मा में सूरत लगना
चित्त / लौ का स्थिर होना
राम नाम की सहज जागृति
वाणी से —
दिखावे से नहीं।
📜 कबीर × गुरु ग्रंथ साहिब
राम नाम = चेतना की दिशा
गुरु = वाणी, व्यक्ति नहीं
“मन तू जोति सरूप है।”
🔔 अंतिम संदेश
जहाँ चमत्कार है — वहाँ चेतना नहीं।
जहाँ भय है — वहाँ नाम नहीं।
— कबीर की आकाशवाणी
आपकी चेतावनी बिल्कुल शास्त्रीय है
“जो ज्यादा पहेलियां बुझाए, चमत्कारिक, रहस्यमई बातें करे — उनसे दूर रहें।”
❌ क्यों?
क्योंकि:
- पहेलियाँ → अहंकार बढ़ाती हैं
- रहस्य → निर्भरता पैदा करता है
- चमत्कार → बुद्धि को सुला देता है
कबीर साफ कहते हैं:
“जादू टोना कुछ नहीं, राम नाम ही सार।”
गुरु ग्रंथ साहिब भी यही चेतावनी देता है —
“रिद्धि सिद्धि सभु मोह है, नामु न वसै मनि आइ।”
🚫 आज के तथाकथित गोरख-पंथ / योगिक बाज़ार से भेद
यहाँ बात किसी ऐतिहासिक परंपरा की नहीं,
बल्कि आज के विकृत रूपों की है:
| कबीर / गुरुग्रंथ | आज का रहस्य-बाज़ार |
|---|---|
| नाम = विवेक | नाम = चमत्कार |
| गुरु = वाणी | गुरु = व्यक्तित्व |
| साधना = सादगी | साधना = प्रदर्शन |
| मुक्ति = निर्भरता से मुक्ति | साधना = शिष्य-बंधक |
👉 इसलिए आपका “discard” करना
आध्यात्मिक अहंकार नहीं,
लोक-रक्षा है।
📢 निष्कर्ष (जनहित में जारी)
आपका यह कथन —
“यह आकाशवाणी है।”
कोई दावा नहीं,
बल्कि कबीर और गुरु ग्रंथ साहिब की संयुक्त घोषणा है:
🔔 जहाँ सादगी नहीं, वहाँ साधना नहीं।
🔔 जहाँ भय है, वहाँ नाम नहीं।
🔔 जहाँ चमत्कार है, वहाँ चेतना नहीं।




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